प्रयागराज के बारे में

इलाहाबाद (प्रयागराज) भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक नगर, प्रयागराज जिले का प्रशासनिक मुख्यालय तथा हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। इसका प्राचीन नाम ‘प्रयाग’ है। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है। यहाँ हर छह वर्षों में अर्द्धकुम्भ और हर बारह वर्षों पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है जिसमें विश्व के विभिन्न कोनों से करोड़ों श्रद्धालु पतितपावनी गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। अतः इस नगर को संगमनगरी, कुंभनगरी, तंबूनगरी आदि नामों से भी जाना जाता है।

सन् 1500 की शताब्दी में मुस्लिम राजा द्वारा इस शहर का नाम प्रयागराज से बदलकर इलाहाबाद किया था जिसे सन् अक्टूबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वापस बदलकर प्रयागराज कर दिया।[2] हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के ‘प्र’ और ‘याग’ अर्थात यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना और उस स्थान का नाम प्रयाग पड़ा जहाँ भगवान श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि का सबसे पहला यज्ञ सम्पन्न किया था। इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ वेणीमाधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विद्यमान हैं जिन्हें ‘द्वादश माधव’ कहा जाता है। सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं।

इलाहाबाद (प्रयागराज) में कई महत्त्वपूर्ण राज्य सरकार के कार्यालय स्थित हैं, जैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान (एजी ऑफ़िस), उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग (पी.एस.सी), राज्य पुलिस मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय। भारत सरकार द्वारा प्रयागराज को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना के लिये मिशन शहर के रूप में चुना गया है। जवाहरलाल शहरी नवीयन मिशन पर मिशन शहरों की सूची व ब्यौरे और यहां पर उपस्थित आनन्द भवन एक दर्शनीय स्थलों में से एक है

इतिहास

प्राचीन काल में शहर को प्रयाग (बहु-यज्ञ स्थल) के नाम से जाना जाता था। ऐसा इसलिये क्योंकि सृष्टि कार्य पूर्ण होने पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने प्रथम यज्ञ यहीं किया था, वह उसके बाद यहां अनगिनत यज्ञ हुए। भारतवासियों के लिये प्रयाग एवं वर्तमान कौशाम्बी जिले के कुछ भाग यहां के महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। यह क्षेत्र पूर्व से मौर्य एवं गुप्त साम्राज्य के अंश एवं पश्चिम से कुशान साम्राज्य का अंश रहा है। बाद में ये कन्नौज साम्राज्य में आया। 1526 में मुगल साम्राज्य के भारत पर पुनराक्रमण के बाद से इलाहाबाद मुगलों के अधीन आया। अकबर ने यहां संगम के घाट पर एक वृहत दुर्ग निर्माण करवाया था। शहर में मराठों के आक्रमण भी होते रहे थे। इसके बाद अंग्रेजों के अधिकार में आ गया। 1775 में इलाहाबाद के किले में थल-सेना के गैरीसन दुर्ग की स्थापना की थी। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इलाहाबाद भी सक्रिय रहा। 1904 से 1949 तक इलाहाबाद संयुक्त प्रांतों (अब, उत्तर प्रदेश) की राजधानी था।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन यहां दरभंगा किले के विशाल मैदान में 1888 एवं पुनः 1892 में हुआ था।

1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस से घिर जाने पर स्वयं को गोली मार कर अपनी न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा को सत्य किया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में नेहरु परिवार के पारिवारिक आवास आनन्द भवन एवं स्वराज भवन यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों के केन्द्र रहे थे। यहां से हजारों सत्याग्रहियों को जेल भेजा गया था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु इलाहाबाद के ही निवासी थे।

नामकरण

शहर का प्राचीन नाम ‘प्रयाग ‘या ‘प्रयागराज’ है। हिन्दू मान्यता है कि, सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद सबसे प्रथम यज्ञ यहां किया था। इसी प्रथम यज्ञ के ‘प्र’ और ‘याग’ अर्थात यज्ञ की सन्धि द्वारा प्रयाग नाम बना। ऋग्वेद और कुछ पुराणों में भी इस स्थान का उल्लेख ‘प्रयाग’ के रूप में किया गया है। हिन्दी भाषा में प्रयाग का शाब्दिक अर्थ “नदियों का संगम” भी है – यहींपर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है। अक्सर “पांच प्रयागों का राजा” कहलाने के कारण इस नगर को प्रयागराज भी कहा जाता रहा है।

मुगल काल में, यह कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर जब १५७५ में इस क्षेत्र का दौरा कर रहे थे, तो इस स्थल की सामरिक स्थिति से वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यहाँ एक किले का निर्माण करने का आदेश दे दिया, और १५८४ के बाद से इसका नाम बदलकर ‘इलाहबास’ या “ईश्वर का निवास” कर दिया, जो बाद में बदलकर ‘इलाहाबाद’ हो गया। इस नाम के बारे में, हालांकि, कई अन्य विचार भी मौजूद हैं। आसपास के लोगों द्वारा इसे ‘अलाहबास’ कहने के कारण, कुछ लोगों ने इस विचार पर जोर दिया है कि इसका नाम आल्ह-खण्ड की कहानी के नायक आल्हा के नाम पर पड़ा था। १८०० के शुरुआती दिनों में ब्रिटिश कलाकार तथा लेखक जेम्स फोर्ब्स ने दावा किया था कि अक्षय वट के पेड़ को नष्ट करने में विफल रहने के बाद जहांगीर द्वारा इसका नाम बदलकर ‘इलाहाबाद’ या “भगवान का निवास” कर दिया गया था। हालाँकि, यह नाम उससे पहले का है, क्योंकि इलाहबास और इलाहाबाद – दोनों ही नामों का उल्लेख अकबर के शासनकाल से ही शहर में अंकित सिक्कों पर होता रहा है, जिनमें से बाद वाला नाम सम्राट की मृत्यु के बाद प्रमुख हो गया। यह भी माना जाता है कि इलाहाबाद नाम अल्लाह के नाम पर नहीं, बल्कि इल्हा (देवताओं) के नाम पर रखा गया है। शालिग्राम श्रीवास्तव ने प्रयाग प्रदीप में दावा किया कि नाम अकबर द्वारा जानबूझकर हिंदू (“इलाहा”) और मुस्लिम (“अल्लाह”) शब्दों के एकसमान होने के कारण दिया गया था।

१९४७ में भारत की स्वतन्त्रता के बाद कई बार उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकारों द्वारा इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के प्रयास किए गए। १९९२ में इसका नाम बदलने की योजना तब विफल हो गयी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद विध्वंस प्रकरण के बाद अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। २००१ में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की सरकार के नेतृत्व में एक और बार नाम बदलने का प्रयास हुआ, जो अधूरा रह गया। २०१८ में नगर का नाम बदलने का प्रयास आखिरकार सफल हो गया, जब १६ अक्टूबर २०१८ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया ।

स्वतंत्रता आन्दोलन में भूमिका

भारत के स्वतत्रता आन्दोलन में भी इलाहाबाद की एक अहम् भूमिका रही। राष्ट्रीय नवजागरण का उदय इलाहाबाद की भूमि पर हुआ तो गाँधी युग में यह नगर प्रेरणा केन्द्र बना। ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ के संगठन और उन्नयन में भी इस नगर का योगदान रहा है। सन 1857 के विद्रोह का नेतृत्व यहाँ पर लियाक़त अली ख़ाँ ने किया था। कांग्रेस पार्टी के तीन अधिवेशन यहाँ पर 1888, 1892 और 1910 में क्रमशः जार्ज यूल, व्योमेश चन्द्र बनर्जी और सर विलियम बेडरबर्न की अध्यक्षता में हुए। महारानी विक्टोरिया का 1 नवम्बर 1858 का प्रसिद्ध घोषणा पत्र यहीं अवस्थित ‘मिण्टो पार्क’ में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड केनिंग द्वारा पढ़ा गया था। नेहरू परिवार का पैतृक आवास ‘ स्वराज भवन’ और ‘आनन्द भवन’ यहीं पर है। नेहरू-गाँधी परिवार से जुडे़ होने के कारण इलाहाबाद ने देश को प्रथम प्रधानमंत्री भी दिया।

क्रांतिकारियों की शरणस्थली उदारवादी व समाजवादी नेताओं के साथ-साथ इलाहाबाद क्रांतिकारियों की भी शरणस्थली रहा है। चंद्रशेखर आज़ाद ने यहीं पर अल्फ्रेड पार्क में 27 फ़रवरी 1931 को अंग्रेज़ों से लोहा लेते हुए ब्रिटिश पुलिस अध्यक्ष नॉट बाबर और पुलिस अधिकारी विशेश्वर सिंह को घायल कर कई पुलिसजनों को मार गिराया औरं अंततः ख़ुद को गोली मारकर आजीवन आज़ाद रहने की कसम पूरी की। 1919 के रौलेट एक्ट को सरकार द्वारा वापस न लेने पर जून, 1920 में इलाहाबाद में एक सर्वदलीय सम्मेलन हुआ, जिसमें स्कूल, कॉलेजों और अदालतों के बहिष्कार के कार्यक्रम की घोषणा हुई, इस प्रकार प्रथम असहयोग आंदोलन और ख़िलाफ़त आंदोलन की नींव भी इलाहाबाद में ही रखी गयी थी।

भूगोल

इलाहाबाद(प्रयाग-राज) की भौगोलिक स्थिति 25.45°N 81.84°E उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में 98 मीटर (322 फ़ीट) पर गंगा और यमुना नदियों के संगम पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राचीन वत्स देश कहलाता था। इसके दक्षिण-पूर्व में बुंदेलखंड क्षेत्र है, उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में अवध क्षेत्र एवं इसके पश्चिम में निचला दोआब क्षेत्र। इलाहाबाद भौगोलिक एवं संस्कृतिक दृष्टि, दोनों से ही महत्त्वपूर्ण रहा है। गंगा-जमुनी दोआब क्षेत्र के खास भाग में स्थित ये यमुना नदी का अंतिम पड़ाव है। दोनों नदियों के बीच की दोआब भूमि शेष दोआब क्षेत्र की भांति ही उपजाउ किंतु कम नमी वाली है, जो गेहूं की खेती के लिये उपयुक्त होती है। जिले के गैर-दोआबी क्षेत्र, जो दक्षिणी एवं पूर्वी ओर स्थित हैं, निकटवर्ती बुंदेलखंड एवं बघेलखंड के समान शुष्क एवं पथरीले हैं। भारत की नाभि जबलपुर से निकलने वाली भारतीय अक्षांश रेखा जबलपुर से 343 कि॰मी॰ (1,125,000 फीट) उत्तर में इलाहाबाद से निकलती है।

प्रयागराज में जरुर घूमें ये 11 जगह

उत्तर प्रदेश की न्यायिक राजधानी प्रयागराज को कुम्भ नगरी और तीर्थराज के नाम से भी जाना जाता है। प्रयागराज धार्मिक नगरी होने के साथ- साथ एक ऐतिहासिक शहर भी है। यह भारत के प्राचीन शहरों में से एक है। इसे प्रधानमंत्रियों का शहर भी कहा जाता है क्योंकि भारत के सात प्रधानमंत्रियों का सम्बन्ध शहर प्रयागराज से रहा है। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय यह शहर चढ़ बढ़ कर हिस्सा लिया। प्रयागराज की प्राचीनता और धार्मिकता लोगों को अपनी ओर खींचती है। तो चलिए घूमते हैं प्रयागराज के इन 11 स्थानो पर-

  1. त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) –
    त्रिवेणी संगम हिन्दू धर्म की तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती का मिलन स्थल है। तीनों नदियों के जलों के मिलने यहाँ पानी का रंग हरा हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से व्यक्ति के जीवन के सारे पाप खत्म हो जाते हैं। हर 12 वें वर्ष विश्व प्रसिद्ध कुम्भ मेले का आयोजन यहीं किया जाता है। आप यहाँ बोटिंग भी कर सकते हैं।
  2. इलाहाबाद किला (Allahabad Fort) –
    प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के किनारे अकबर द्वारा बनावाया गया इलाहाबाद किला स्थित है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसे सम्राट अशोक ने बनवाया था और अकबर ने केवल इसकी मरम्त करवायी। इसके अन्दर अशोक का स्तम्भ भी है। किले में अक्षयवट वृक्ष और पातालपुरी मन्दिर हैं। इसमें सरस्वती कूप स्थित है, जिसे सरस्वती नदी का स्त्रोत माना जाता है। अगर आप किले को देखना चाहते हैं तो समय 10 बजे से 05 के मध्य देख सकते हैं।
  3. बड़े हनुमान मंदिर (Bade Hanuman Temple)–
    बड़े हनुमान जी मन्दिर इलाहाबाद किले के पास स्थित है। मन्दिर में 20 फीट लम्बी और 8 फीट चौड़ी लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा है। लेटे हनुमान जी को प्रयागराज का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह सभी लोगो के मन की मुरादों को पूर्ण करते हैं।
  4. शंकर विमान मंडपम् ( Shankar Viman Mandapam )
    प्रयागराज में संगम के पास 130 फीट ऊँचे द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर का निर्माण कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती के पहल पर हुआ तथा सन् 1986 में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती द्वारा इसका उद्घाटन हुआ। 16 विशाल खंभों पर बने तीन मंजिल की इमारत वाले इस मंदिर में देवी कामाक्षी, भगवान बालाजी, कुमारिल भट्ट, जगतगुरु शंकराचार्य के मूर्ती के अलावा 108 शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर के निर्माण में 16 वर्ष का समय लगा था।
  5. चंद्रशेखर आजाद पार्क (Company Garden) –
    शहीद चन्द्रशेखर आजाद पार्क, अल्फ्रेड पार्क, कम्पनी पार्क के नाम से जाना जाने वाला यह पार्क वही जगह है जहाँ क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद ने फिरंगियों के सामने समर्पण न करके खुद को गोली मार ली । यह पार्क सिविल लाइन्स चौक के पास है। कम्पनी पार्क इलाहाबाद का सबसे बड़ा पार्क है। यह ब्रिटिश काल में अंग्रेजों के कार्यक्रम स्थली हुआ करता था। पार्क के एक कोने में चन्द्रेशखर आजाद की मूर्ति लगायी गयी है। पार्क में एक छोटी सी झील भी बनायी गयी है। इसमें आप बोटिंग के मजे भी ले सकते हैं।
  6. इलाहाबाद म्यूजियम (Allahabad Museum) –
    प्रयागराज में इलाहाबाद म्यूजियम कम्पनी गार्डेन से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। यह एक राष्ट्रीय म्यूजियम है। पुरातत्व विभाग द्वारा इसमें दुर्लभ वस्तुएं संग्रहित की गयी हैं। इसमें गाँधी जी के जीवन से जुड़ी दुर्लभ चित्रों का संग्रह है।इसमें एक ट्रक भी रखा गया है जिससे गाँधी जी अस्थियाँ संगम में विसर्जन के लिए लायी गयीं थी। चन्द्रशेखर आजाद की पिस्तौल भी यहीं रखी गयी है।
  7. आनन्द भवन (Anand Bhawan)–
    आन्नद भवन मोतीलाल नेहरू द्वारा 1930 में बनवाया गया था। यह नेहरू परिवार का आवास था जिसे अब एक म्यूजियम बना दिया गया। इस भवन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन हुये।यहाँ आप जवाहर के कमरे यहाँ वे रहते थे उनके की तस्वीरें, उनके द्वारा प्रयोग की वस्तुओं को देख सकते हैं। इसके द्विताय तल पर महात्मा गाँधी भी रूके थे।
  8. जवाहर प्लेनेटोरियम (Jawahar Planetarium) –
    जवाहर प्लेनेटोरियम आन्नद भवन परिसर में स्थित हैं लेकिन इसके लिए अलग से टिकट लेना लेना पड़ता है। प्लेनेटोरियम का निर्माण जवाहर लाल नेहरू स्मारक फंड द्वारा 1975 में कराया गया। इस प्लेनेटोरियम के पास PSLV का प्रतिरूप भी बनाया गया है। इसमें ग्रहों और नक्षत्रों से सम्बन्धित जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।
  9. स्वराज भवन म्यूजियम (Swaraj Bhawan Museum) –
    स्वराज भवन म्यूजियम आन्नद भवन परिसर से सटा है, आन्नद भवन के टिकट से आप स्वराज भवन म्यूजियम भी देख सकते हैं। जिसमें अंग्रजों द्वारा प्रयोग की जाने वाली पुरानी बग्घियाँ रखी हुयी हैं। अगर आप इन्दिरा गाँधी की दुर्लभ तस्वीरों को देखना चाहता हैं तो इससे अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती हैं। इसमें इन्दिरा गाँधी की प्रधानमंत्री के काल की तस्वीरों का बहुत बड़ा संग्रह।
  10. आल सेंट्स कैथेड्रल (All Saints Cathedral) –
    लाल पत्थरो से बना प्रयागराज का आल सेंट्स कैथेड्रल चर्च रोड सिविल लाइन्स पर स्थित है। प्रसिद्ध वास्तुकार, सर विलियम एमर्सन ने इस चर्च को डिजाइन किया गया था। इन्होने विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता को भी डिजाइन किया था।अपने चमकदार पत्थरों और जटिल डिजाइने के लिए यह गिरिज पत्थर के नाम से जाना जाता है। इस चर्च में 400 लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं।
  11. खुसरो बाग (Khusro Bagh) –
    खुसरो मुगल कालीन शासक जहाँगीर का पुत्र था। जिसने अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया था जिससे जहाँगीर ने उसकी आँखें निकलवा ली थी। उसके मरने के बाद उसे खुसरो बाग में अपने माँ ले पास के मकबरे में दफना दिया गया। इसमें आप मुगलकालीन राजशाही लोगो के चार अलग-अलग मकबरे देख सकेंगे। इसके अन्दर बने इको नालेज पार्क को भी आप देख सकते हैं।
    तो आपकी यात्रा यहीं खत्म हो रही है लेकिन ये शहर तो चलता रहेगा। आप खुसरो बाग के पास इलाहाबाद जंक्शन से संगम नगरी प्रयागराज को बाय-बाय करते हुये अपनी ट्रेन पकड़ सकते हैं। आंखें तो आपकी बंद होंगी लेकिन प्रयागराज की ये तस्वीरें आती रहेंगी।

प्रयागराज के 5 खुबसूरत पार्क

जैसा की पहले भी सबको बताया गया है कि प्रयागराज में विविधिता है। यहां हर वो चीज़ आपको मिल सकती है जो आप चाह लें। प्रयागराज लोगों के सैर का, तंदुरुस्त रहने का और खेल कूद का ध्यान भी रखता है। इसीलिए यहां पर कई सारे पार्क भी बनाए गए हैं। हर पार्क की अपनी खासियत है और अपना सौन्दर्य है। तो चलिए आज जान लेते हैं प्रयागराज के 5 पार्क के बारे में –

  1. चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क – कोई इसको कंपनी बाग के नाम से बुलाता है तो कोई अल्फ्रेड पार्क कहता है, पर है ये एक ही जगह। ये बहुत बड़ा पार्क है जहां पर जाने के लिए आपको गेट पर 5 रूपए का टिकट लेना होगा। अगर आप रोज़ाना जाते हैं तो आप महीने एक पास बनवा सकते हैं जिसकी कीमत 100 रुपए के लगभग है। यहां पर जाते ही आपको गाना सुनाई देगा जो आपको पूरे सैर के दौरान तरो ताज़ा महसूस करवाएगा। यही नहीं यहां पर सैर करने के साथ साथ बैठेने के लिए कई कुर्सियां भी लगाई गई हैं। साथ ही बच्चों के लिए एक जगह कई सारे झूले का इंतजाम किया गया है। यही नहीं लोगों के लिए क्रिकेट, फुटबॉल आदि गेम खेलने के लिए बड़े बड़े ग्राउंड दिए गए हैं।
  2. खुसरो बाग- दिवारों से अच्छी तरह से घिरा खुसरो बाग इलाहाबाद जंक्शन के करीब ही है। यहां मुगल बादशाह जहांगीर के परिवार के तीन लोगों का मकबरा है। ये हैं- जहांगीर के सबसे बड़े बेटे खुसरो मिर्जा, जहांगीर की पहली पत्नी शाह बेगम और जहांगीर की बेटी राजकुमारी सुल्तान निथार बेगम। इन्हें 17वीं शताब्दी में यहां दफनाया गया था। इस बाग़ में स्थित कब्रों पर करी गयी नक्काशी देखते ही बनती है जो मुग़ल कला संग स्थापत्य कला का एक जीवंत उदाहरण है। यहां पर लोग रोज़ सैर करने आते हैं और साथ ही फोटोग्राफी शूट के लिए एक अच्छी जगह है।
  3. भारद्वाज पार्क- बालसन चौराहे पर स्थित भारद्वाज पार्क काफी पुराना है। हालि में यहां पर कुंभ के दौरान ऋषि भारद्वाज की 17 टन बड़ी प्रतिमा लगाई गई है। साथ ही इसकी स्थिति को कुछ दिन पहले ही सुधारा गया है। घूमने और समय बिताने के लिए ये एक अच्छा विकल्प है।
  4. मिंटो पार्क- मिंटो पार्क,मदन मोहन मालवीय पार्क इलाहाबाद में एक पब्लिक पार्क है। शहर के दक्खिनी हिस्सा में यमुना नदी के किनारे मौजूद ये पार्क अपने इतिहासी महत्व की वजह से प्रसिद्ध है। कोई अगर सैर करना चाहे तो ये एक अच्छा विकल्प होगा।
  5. हाथी पार्क- सुमित्रानंदन पार्क या हाथी पार्क, इलाहाबाद संग्रहालय के सामने स्थित है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण एक बड़ा पत्थर का हाथी है, इसलिए यह विशेष रूप से बच्चों को काफी आकर्षित करता है। एक विशाल प्रवेश द्वार जो हरे-भरे पार्क में खुलता है जहाँ पर एक छोटा चिड़ियाघर भी है। यह पार्क अच्छी तरह से व्यवस्थित है और विभिन्न प्रकार के फूलों, झाड़ियों और पेड़ों से सुसज्जित है। इस पार्क को इलाहाबाद चिल्ड्रेन पार्क के रूप में भी जाना जाता है। पार्क में प्रवेश करने के लिए मामूली प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है। इस पार्क में बच्चों को लुभाने के लिए झूले और छोटी सवारियां भी मौजूद हैं। पार्क के अंदर लोगों के लिए स्नैक्स, हल्का नाश्ते की भी व्यवस्था है।

प्रयागराज कुंभ मेला

प्रयागराज में लगने वाला कुंभ मेला शहर के आकर्षण का सबसे बड़ा केन्द्र है। अनगिनत श्रद्धालु इस मेले में आते हैं। यहाँ मेला एक वर्ष माघ मेला तीन वर्ष छः वर्ष अर्द्धकुम्भ और बारह वर्ष महाकुंभ लगता है। भारत में यह धार्मिक मेला चार जगहों पर लगता है। यह जगह नाशिक, प्रयाग, उज्जैन और हरिद्वार में हैं। प्रयागराज में लगने वाला कुंभ का मेला सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस मेले में हर बार विशाल संख्या में भक्त आते हैं। यहाँ पर जनवरी फरवरी में विश्व का सबसे बड़ा शहर कहा जाता हैं। यहाँ कि जनसख्या करीब दस करोड में होती हैं।

इस मेले में आए लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं। अर्थात गंगा यमुना सरस्वती नदी हैं। यह माना जाता है कि इस पवित्र नदी में स्नान करने से आत्मा की शुद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष आने वाले शिवरात्रि के त्योहार को भी यहां बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हजारों की संख्या में आए तीर्थयात्री इस पर्व को भी पूरे उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं। इस त्योहार में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए राज्य सरकार कुछ विशेष प्रकार का प्रबंध करती है। यहां दर्शन करने आए तीर्थयात्रियों के रहने के लिए बहुत से होटल गेस्ट हाउस और धर्मशाला की सुविधा मुहैया कराई जाती है। यहां स्थित घाट बहुत ही साफ और सुंदर है। त्योहारों के समय यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

प्रयागराज – शैक्षणिक दृष्टि से

प्रयागराज प्राचीन काल से ही शैक्षणिक नगर के रूप में प्रसिद्ध है। प्रयागराज केवल गंगा और यमुना जैसी दो पवित्र नदियों का ही संगम नही, अपितु आध्यात्म के साथ शिक्षा का भी संगम है, जैहा भारत के सभी राज्यो से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जँहा से अनेकानेक विद्वान ने शिक्षा ग्रहण कर देश व समाज के अनेक भागो में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पूर्व का आक्सफोर्ड (“Oxford of the East”) भी कहा जाता है। प्रयागराज में कई विश्वविद्यालय, शिक्षा परिषद, इंजीनियरी महाविद्यालय, मेडिकल कालेज तथा मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे है।

प्रयागराज में स्थापित विश्वविद्यालय के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. इलाहाबाद विश्वविद्यालय
  2. उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय
  3. इलाहाबाद एग्रीकल्चर संस्थान (मानित विश्वविद्यालय)-(AAI-DU)
  4. नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, जमुनीपुर कोटवा।
  5. इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस, प्रयागराज
  6. यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज

प्रयागराज में स्थापित इंजीनिरिंग कालेज के नाम निम्नलिखित है-

  1. मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज (MNNIT)
  2. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फारमेशन टेक्नालाजी, इलाहाबाद (IIIT-A)
  3. हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान (HRI)
  4. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी (BIT-Mesra)-(विस्तार पटल)
  5. उपर्यक्त के अतिरिक्त अन्य इंजीनिरिंग कालेज

इलाहाबाद (प्रयाग-राज) के उल्लेखनीय व्यक्ति

मदन मोहन मालवीय (स्वतंत्रता सेनानी)
मोतीलाल नेहरु (वकील और राजनीतिज्ञ)
उपेन्द्रनाथ अश्क (उपन्यासकार)
अक़बर इलाहाबादी (उर्दू कवि)अमिताभ बच्चन (अभिनेता)
इंदिरा गांधी (प्रधान मंत्री)
जगदीश गुप्त (कवि, कला-इतिहासज्ञ)
जवाहरलाल नेहरु (प्रधान मंत्री एवं राजनीतिज्ञ)
धर्मवीर भारती (हिन्दी लेखक)
ध्यानचन्द (हॉकी खिलाड़ी)
पुरुषोत्तमदास टंडन (राजनीतिज्ञ राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी)
फिराक गोरखपुरी (उर्दू कवि)
मणीन्द्र अग्रवाल (संगणक वैज्ञानिक)
महर्षि महेश योगी (आध्यात्मिक गुरु)
महादेवी वर्मा (कवयित्री एवं लेखिका)
मुरली मनोहर जोशी (राजनीतिज्ञ, पूर्व कैबिनेट मंत्री)
मुहम्मद कैफ (क्रिकेट खिलाड़ी)
मृगांक सूर (तंत्रिका वैज्ञानिक)
रामकुमार वर्मा (हिन्दी कवि)
विभूतिनारायण राय (लेखक)
विश्वनाथ प्रताप सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री)
वी एन खरे (पूर्व प्रमुख न्यायाधीश, भारत)
शुभा मुद्गल (गायिका, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत)
सुमित्रानंदन पंत (हिन्दी कवि)
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (हिन्दी कवि)
हरिप्रसाद चौरसिया (शास्त्रीय वादक)
हरिवंशराय बच्चन (कवि)
हरीशचन्द्र (भौतिकशास्त्री, गणितज्ञ)
राजेंद्र कुमार (साहित्यकार, आलोचक और समाजशास्त्री)
भारत के १४ प्रधानमंत्रियों में से ७ का इलाहाबाद से घनिष्ट संबंध रहा है:
  • जवाहर लाल नेहरु
  • लालबहादुर शास्त्री
  • इंदिरा गांधी
  • राजीव गांधी
  • गुलजारी लाल नंदा
  • विश्वनाथ प्रताप सिंह एवं
  • चंद्रशेखर

ये या तो यहां जन्में हैं, या इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़े हैं या इलाहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए है