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जानिए छात्रों को कैसे पत्र के माध्यम से गुमराह कर रही हैं एयू वीसी 

जानिए छात्रों को कैसे पत्र के माध्यम से गुमराह कर रही हैं एयू वीसी 

गत दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए एक ओपन लेटर में कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फीस विगत 100 वर्षों से नही बढ़ाई गई है तथा उन्होंने ने AU के फीस की तुलना अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा निजी विश्वविद्यालयों से करते हुए फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों को अपराधी प्रकृति का तत्व करार दिया है ।

आइए समझते हैं : 

बताते चलें की इससे पूर्व वर्ष 2017 में तत्कालीन कुलपति प्रो• रतन लाल हांगलू, अधिष्ठाता छात्र कल्याण राणा कृष्णपाल सिंह और कुलानुशासक प्रो• रामसेवक दुबे ने हॉस्टलों की फीस दुगुना करते हुए तर्क दिया था की इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एकेडेमिक फीस अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी है और हम हॉस्टल की फीस बढ़ा कर उसी की भरपाई कर रहे हैं तब तत्कालीन कुलपति ने छात्रों को आश्वासन दिया था की इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एकेडमिक फीस में वृद्धि नही की जायेगी और वर्ष 2017 में हॉस्टल फीस को बढ़ा कर दुगुना कर दिया गया था ।

अगर हम हॉस्टल फीस और एकेडेमिक फीस को जोड़ देंगे तो एक आम छात्र को प्रतिमाह ₹2000 तक केवल फीस जमा करने में ही देने होंगे और यदि इसमें हॉस्टल मेस के घटिया खाने का खर्च भी जोड़ दिया जाए जो की महीने का ₹3000 होता है तो कुल खर्च ₹5000 से अधिक हो जायेगा और फिर नोट्स, पुस्तकें, कलम जैसे अन्य पढ़ाई से जुड़े खर्च तो छात्र के महीने के खर्च को और भी ज्यादा बढ़ा देंगे, जिससे पिछड़े एवं गरीब घरों से आने वाले 75% से 80%  लड़के/लड़कियां जिनको घरवालों से मात्र महीने का ₹3000 मिलता है वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ भी नही पाएंगे।

दूसरी ओर वर्तमान समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों की फीस देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सबसे ज्यादा है आंकड़े देखिए :-

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में हॉस्टल फीस : ₹2740 वार्षिक

दिल्ली विश्वविद्यालय : ₹5500

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में  : ₹3000 वार्षिक 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  : ₹2100 वार्षिक 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय  : 6750 वार्षिक 

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी  : ₹1850 वार्षिक है 

वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टल की फीस सर्वाधिक ₹14500 रुपए है । 

आज निवर्तमान कुलपति एकेडमिक फीस बढ़ाते हुए तर्क दे रही हैं की वर्तमान में AU की फीस अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में कम है और वे उन्ही विश्वविद्यालयों  के अनुरूप फीस बढ़ोतरी कर रही हैं।

कुलपति महोदया ये भूल जाती हैं की अन्य विश्वविद्यालयों के ऊपर स्वयं को स्थापित करने के दबाव है, इसलिए अधिक फीस लेकर वो सुविधाएं उपलब्ध करा रहे है और उनकी फीस वृद्धि उनके NIRF रैंकिंग में दिखाई देती है । वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद विश्वविद्यालय 135 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा को लिए हुए है और खुद को स्थापित करने के दबाव से मुक्त है तब भी वह खुद के अलॉट किए गए फंड की संपूर्ण राशि को नही खर्च कर पाता है ।

अगर वर्तमान फीस वृद्धि का फार्मूला लागू हो जाता है तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय सबसे महंगे केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेणी में होगा और उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्यप्रदेश के गांवों, से आने वाली एक बड़ी गरीब छात्र-छात्राओं की आबादी केंद्रीय विश्वविद्यालय में पढ़ने के सपने को पूरा करने से वंचित रह जाएगी।

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Written by AU Beat Media

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय: जानिए क्या है ये नई फीस वृद्धि का फार्मूला जिसके लिए हो रहा इतना हंगामा !