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सफलता की कहानी : ठेले पर सब्जी बेचने के साथ की पढ़ाई, बने जज

सफलता की कहानी : ठेले पर सब्जी बेचने के साथ की पढ़ाई, बने जज

हर प्रदेश में ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा कठिनतम परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसी के कारण सभी अभ्यर्थी इस परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं। वहीं दूसरी ओर जो अभ्यर्थी इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर लेते हैं तो वो दूसरे अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे ही प्रेरणास्रोत व्यक्ति की कहानी जिनका नाम शिवाकांत कुशवाहा है। शिवकांत जी मध्यप्रदेश के सतना के निवासी हैं। वर्तमान में शिवकांत जी एक जज हैं। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत ही कठिन समस्याओं का सामना करना पड़ा । आइये जानते हैं इनके संघर्ष के बारे में।

लगाते थे सब्जी का ठेला

शिवाकांत का मूलरूप से निवास स्थान मध्य प्रदेश के सतना जिले का अमरपाटन नामक कस्बा हैं। शिवकान्त बहुत ही गरीब परिवार से हैं इनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब थी। इसी कारण वो अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिये वह स्वयं अपने अमरपाटन नामक कस्बे में सब्जी का ठेला लगाते थे। इसी ठेले पर सब्जी बेचने के साथ साथ जो भी खाली समय उनको मिलता वह उसी दौरान वो पढ़ाई भी करते थे। कभी-कभी तो वह किसी टॉपिक को पूरा करने के लिये ठेले पर भी पढ़ाई कर लिया करते थे।

लोगों द्वारा उड़ाया जाता था मजाक

जब शिवकांत कभी सब्जी की दुकान लगाने के दौरान पढ़ाई करते तो जो लोग सब्जी लेने आते तो पूछ देते थे कि क्या कर रहे हो तो वह लोगों से कह देते थे कि देखना एक दिन मैं जज बनूंगा। उनकी इस बात को सुनकर कुछ लोग इनका मजाक भी उड़ाते थे क्योंकि वो लोग भी सोचते थे कि आखिर बेचता तो पूरे दिन सब्जी है , ये जज कैसे बनेगा? परंतु अपनी कठिन मेहनत और संघर्ष के बल पर शिवकांत ने वो कर दिखाया। शिवाकांत ने वर्ष 2019 की सिविल जज की परीक्षा को पास कर के अपने माता-पिता तथा अपने परिवार का भी नाम रोशन किया । उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग में में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ ।

बार बार असफल होने के बाद आखिरकार 10वीं बार में नसीब हुई सफलता

शिवकांत बार बार इस परीक्षा में असफल हुए लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नही हारी। शिवाकांत को यह सफलता 10वीं बार मे प्राप्त हुई । उन्होंने जब 9 बार परीक्षा दी और उसमें असफल हुए तो एक समय के लिए थोड़ा टूट चुके थे लेकिन 10वीं बार की परीक्षा में उन्होंने बहुत कठिन परिश्रम और संघर्ष के पश्चात सफलता हासिल कर ली। शिवाकांत ने मीडिया से बातचीत के दौरान सफलता का एक ही मूल मंत्र बताया कि मेहनत, मेहनत और मेहनत। यदि आप कठिन मेहनत करते हैं, तो सफलता प्राप्त करने से आपको कोई रोक नहीं सकता है।

जज के कहने पर की थी LLB की पढ़ाई

ठेले पर सब्जी बेचने के साथ साथ शिवाकांत कुशवाहा ने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। बात सन 2007 की है कि एक दिन इनके सब्जी के ठेले पर आए और कहा कि यदि तुमको अपनी किस्मत बदलनी है तो मेरी बात मानो LLB कर लो और जज बन जाओ।

पत्नी ने भी दिया संघर्ष में साथ

शिवकांत को जो सफलता प्राप्त हुई उसमे उनकी पत्नी का भी बहुत योगदान रहा है। एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर उनकी पत्नी मधु कुशवाहा ने उनको बहुत सहयोग प्रदान दिया। वह हमेशा शिवकान्त को पढ़ाई करने के लिए उत्साहित करती रहती थी तथा इसके साथ ही शिवाकांत के द्वारा लिखे गए लेख को भी चेक करती थीं, इसको चेक करने के समय मधु को जो भी गलतियां उसमें मिलती वो उस पर गोला बना देती थीं। इसने शिवाकांत की हिंदी सुधारने में बहुत मदद की।

Written by AU Beat Media

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