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11 साल पहले आज ही मिली थी इसरो को कामयाबी, चंद्रयान-1 के सफलता की कहानी

आज है 24 सितंबर और आज का दिन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण है, एक ओर 2009 में भारत के चन्द्रयान-1 मिशन को सफलता मिली वहीं दूसरी ओर 2014 में मंगलयान, मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया । आज हम आपको भारत के पहले और सफल चंद्र मिशन चंद्रयान-1 के बारे में बताएंगे

चन्द्रमा के करीब चक्कर लगाता चन्द्रयान । फोटो- गूगल

इस मिशन को लीड किया था भारत सरकार के अधीन आने वाला इसरो ने अगर आपमें से कुछ लोग पूछेंगे कि इसरो क्या है तो चलिए बता देते हैं इसरो का फुल फार्म है इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन हिंदी में बोले तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन जिसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुआ और हेड क्वार्टर कर्नाटक के बेंगलुरु में है ।

इसरो का लोगो । फोटो -गूगल

तो हुआ कुछ यूं कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई, 15 अगस्त 2003 को अपने भाषण में यह घोषणा किये कि भारत चंद्रमा पर पहुंचने के लिए चंद्रयान-1 मिशन चलाएगा फिर क्या था हमारे इसरो के होनहार वैज्ञानिकों ने दिन-रात की मेहनत की और कुछ उतार-चढ़ाव के बीच 22 अक्टूबर 2008 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारत के इस महत्वकांक्षी मिशन को लांच कर दिया गया चंद्रयान को लांच करने के लिए जिस लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल किया गया उसका नाम था पीएसएलवी एक्सएल c11 ।

लांचिंग व्हीकल के माध्यम से लांच होता सैटेलाइट। फोटो – गूगल

चंद्रयान-1 11 विशेष वैज्ञानिक उपकरणों से लैस था जिसमें पांच भारत ने खुद बनाए थे वहीं अन्य यंत्र यूरोप और अमेरिका से खरीद कर लगाया गया था यह यंत्र 3D तस्वीरें, सौर तूफान के अध्ययन चांद के भूगोल का अध्ययन और खनिज पदार्थों के अध्ययन में प्रयोग किए जाने वाले यंत्र थे ।

22 अक्टूबर 2008 को श्रीहरिकोटा से यह चंद्रयान चंद्रमा की ओर निकला और यहां लोगों की आशाएं बढ़ने लगी लेकिन सबसे ज्यादा चिंता का जो विषय था वह यह था कि अभी तक दुनिया के किसी देश ने पहले प्रयास में चंद्रमा को फतह नहीं किया था चाहे वह अमेरिका का नासा हो या चीन और रूस की स्पेस एजेंसी हो
लेकिन जैसे ही भारत का चंद्रयान-1 मिशन सफलता की ओर बढ़ने लगा भारत में इतिहास रच दिया भारत विश्व का पहला देश बन गया जिसने पहले प्रयास में चांद को फतह किया और चांद तक पहुंचने वाला छठा देश बन गया भारत, भारत से पहले यह काम अमेरिका रूस यूरोप चीन और जापान की एजेंसियां कर चुकी थी
चंद्रयान-1 चंद्रमा से 100 किलोमीटर दूरी तक की कक्षा में 34 सौ से अधिक चक्कर लगाए जिसमें उसे 10 महीने का समय लगा इस समय अंतराल में चंद्रयान-1 ने बताया कि चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी उपस्थित है साथ ही चंद्रमा की सतह पर मैग्नीशियम एलुमिनियम और शिलिकान जैसे रासायनिक तत्व भी मौजूद हैं

प्रारंभ में चंद्रयान की खबरों पर दुनिया ने ध्यान नहीं दिया लेकिन 24 सितंबर 2009 को नासा ने अपने जर्नल में चंद्रमा पर पानी की पुष्टि की खबर छापी जिसके बाद भारत के चंद्रयान 1 की रिसर्च पर मुहर लग गई और दुनिया ने भारतीय एजेंसी इसरो का लोहा मानना शुरू कर दिया
यूं तो चंद्रयान 1 को 2 वर्षों तक चंद्रमा का अध्ययन करना था लेकिन 10 महीने तक ही यह अध्ययन कर पाया फिर भी इतने समय में चंद्रयान-1 ने जो जानकारियां दी उसके आधार पर चंद्रयान-1 को सफल माना गया
राज्यसभा में सरकार की ओर से दिए गए जानकारी के अनुसार इस मिशन में कुल 386 करोड रुपए खर्च हुए जो कि दुनिया की अन्य एजेंसियों के खर्चों से बहुत कम था

कुल मिलाकर चंद्रयान-1 की सफलता भारत के अंतरिक्ष इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है जिससे चन्द्रयान-2 की नीव रखी इसके लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों का योगदान तारीफ के काबिल है
तो यह थी चंद्रयान-1 की सफलता की कहानी जो कि आज से ठीक 11 साल पहले 24 सितंबर को सफल सिद्ध हुआ था।आपको हमारा यह खबर अच्छा लगा हो तो अपने मित्रों के साथ शेयर करें और कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया दें अन्य खबरों के लिए एयूबीट मीडिया के सोशल प्लेटफॉर्म से जुड़े रहिए। शुक्रिया…

Written by AU Beat Media

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