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इविवि के छात्र शहीद लाल पद्मधर की कसमें खाता है छात्रसंघ, आज है उनका शहादत दिवस

12 अगस्त 1942 इलाहाबाद के कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराने के लिए यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं का एक हुजूम छात्रसंघ भवन से निकला जुलूस में लाल पद्मधर सिंह, एनडी तिवारी, नयनतारा सहगल, हेमवती नंदन बहुगुणा, चंद्रभूषण त्रिपाठी आदि शामिल थे। नयनतारा सहगल और लाल पद्मधर जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। इससे एक दिन पहले यानी 11 अगस्त को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के यूनियन हाल में छात्रों की एक सभा हुई। सभा में ब्रिटिश सरकार के द्वारा लगाई गई धारा 144 को तोड़ने और भारत छोड़ो आंदोलन का खुलकर समर्थन करने का निर्णय लिया गया था।

शहीद लाल पद्मधर


कलेक्ट्रेट से पहले ही छात्रों के जुलूस को पुलिस ने रोक दिया। चेतावनी दी गई. फिर भी जुलूस नहीं रुका तो तत्कालीन कलेक्टर डिक्सन और एसपी आगा ने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया। लाठीचार्ज के बावजूद छात्रों की भीड़ पीछे हटने को तैयार न थी। डिक्सन ने हवाई फायर का आदेश दिया। लेकिन इसका भी कुछ असर न हुआ तो उसने लड़कियों की ओर स्ट्रेट फायरिंग का आदेश दे दिया।
फायरिंग से बचने के लिए लड़कियां जमीन पर लेट गईं लेकिन हाथ में तिरंगा लिए नयनतारा सहगल अपनी जगह पर ही खड़ी रहीं। उनके हाथ में तिरंगा था और उसके सम्मान में वह जमीन पर नहीं झुकीं। लाल पद्मधर ने देखा कि अंग्रेज नयनतारा पर गोली चला देंगे तो उन्होंने दौड़कर तिरंगा अपने हाथ में ले लिया। भीड़ तितर-बितर हो गई थी। हाथ में तिरंगा थामे लाल पद्मधर अकेले कचहरी की तरफ बढ़ने लगे।

शूट हिम अलोन” एक नया आदेश हवा में गूंजा। कलेक्टर के आदेश के बाद लाल पद्मधर जोर-जोर से “इंकलाब जिंदाबाद,” और “भारत मां को आजाद करो” के नारे लगाने लगे। तब तक एसपी आगा ने अपनी पिस्तौल निकाली और लाल पद्मधर की छाती पर दो गोलियां दाग दी। लाल पद्मधर जमीन पर गिर गए।

इविवि छात्रसंघ भवन

पूरे शहर में लाल पद्मधर के शहादत की खबर आग की तरह फैली। उनका शव छात्रसंघ भवन लाया गया। जुलूस में शामिल रहे छात्रों ने लाल पद्मधर के खून को अपने हाथों में लगाकर बदला लेने की शपथ ली। गुस्साए छात्रों ने कर्नलगंज थाने में आग लगा दी। लेकिन सरकार पहले से तैयार थी। छात्रसंघ को तत्काल भंग कर प्रतिबंधित कर दिया गया। सारे हॉस्टलों को खाली करा लिया गया और जुलूस में शामिल शामिल छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 3 साल बाद 1945 में छात्रसंघ बहाल हुआ। तब से लेकर आज तक इलाहाबाद की छात्र राजनीति में लगने वाला पहला आखिरी नारा लाल पद्मधर का होता है। संगठन कोई भी हो, छात्रसंघ की शपथ लाल पद्मधर के नाम से ही ली जाती है।

लेखक: गौरव श्याम पांडेय

Written by AU Beat Media

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