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‘धोनी बनते नहीं, धोनी तो बस होते हैं’ – जन्मदिन विशेष

इकबाल साहब का एक शे’र है – “हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा!”

ये शे’र बहुत पहले ही लिख दिया था लेकिन 7 जुलाई 1981 को ये शे’र सार्थक सिद्ध हुआ जब पान सिंह के घर एक हीरा पैदा हुआ;
नाम रखा गया “माहिया”..
हम सबका “माहिया”..
जिसने क्रिकेट को जितना खेला और समझा उससे कहीं ज़्यादा!

1994 : Young Cricketer Mahendra Singh Dhoni In School.

सभी जानते हैं कि भारत गाँवों का देश है, इसकी आत्मा गाँवों में ही बसती है! स्वाभाविक है कि शहरों में स्थापित कुछेक क्रिकेट अकादमियों और व्यवस्थित मैदानों से कहीं ज्यादा क्रिकेट दो गाँवों को जोड़ने वाली कच्ची सड़क पर होता है,किसी बगीचे के बीच में खाली स्थान पर होता है; आमतौर पर ऐसी जगहों पर पिच समतल होती है लेकिन असली क्रिकेट तो जोत से परती छोड़े गए खेत में खेला जाता है जिसका पूरा मैदान असमान रूप से मिट्टी भाँति भाँति के छोटे-बड़े ढ़ेलों से भरा पड़ा होता है|फावड़े से पूरी पिच को बराबर न करके सिर्फ दो तिहाई हिस्से को ही समतल करके उस पर एक बाल्टी पानी का छिड़काव करके क्रिकेट मैच का शुभारंभ किया जाता है,वो अलग बात है कि वो एक बाल्टी पानी सिर्फ धूल को उड़ने से ही रोक पाती है|

ऐसी परिस्थिति के होते हुये भी यहाँ क्रिकेट खेलने वाला हर युवा क्रिकेट में अपना भविष्य देखता है! जेठ दुपहरी में जब सब गर्मी से त्रस्त होकर घरों में दुबके होते हैं तब कहीं किसी हिस्से में कुछ युवा, कुछ वयस्क और कुछ 30 की उम्र पार चुके लोग खेतों में बल्ले भांज रहे होते हैं|ऐसा कदापि नहीं है कि क्रिकेट की बारीकियों से इनका कोई परिचय नहीं होता है लेकिन यहाँ क्रिकेट मैच अक्सर 8 या 10 ओवर का होता है तो बल्लेबाज अपनी स्किल्स पे ध्यान न देकर ज़ोर आजमाइश करता है और ऐसे ही लोगों के लिए रोल मॉडल; ऐसे ही लोगों के बीच से निकला खिलाड़ी है महेंद्र सिंह धोनी जिसे मही, माहिया और धोनिया के नाम से भी इसलिये जाना जाता है क्योंकि उसका सम्बन्ध ऐसे ही छोटी जगहों से है (कहीं कहीं माहिया भी लिखा मिलता है जोकि किसी ने उनकी स्टारडम को देखते हुये कूल वाला नाम दे दिया) |

23 दिसम्बर, 2004 को शुरू हुआ एक सफ़र अब भी उम्र के बढ़ने के साथ भी बदस्तूर जारी है, देश-विदेश के हर एक मैदान में
धोनी……………….
धोनी………………. की गूँज ही ये बताने के लिये काफी है कि इस खिलाड़ी ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है और ये स्थान किसी एक दो पारी की वजह से नहीं हासिल किया जा सकता है, ये परिचायक है; इस बात का कि भारत की कप्तानी करते हुये इस दलनायक ने एक मानक स्थापित कर दिया है जो अब आगे आने वालों कप्तानों के लिए पहली बाधा होगी!

धोनी के अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट शुरू करने से पहले भारतीय क्रिकेट प्रदर्शन करने वाले एक अदद विकेटकीपर बल्लेबाज के अकाल से जूझ रहा था, पाकिस्तान के खिलाफ़ 148 रन की पारी और फिर श्रीलंका के खिलाफ़ 183 रनों की पारी ने ये बता दिया कि लंबे समय से चले आ रहे सूखे को खत्म कर
धोनी भविष्य में कई कीर्तिमान रच सकते हैं|2007 वन डे वर्ल्ड कप में मिली अप्रत्याशित हार ने बोर्ड को सोचने का मौका दिया और फिर सितम्बर के महीने में आयोजित होने वाले पहले टी-20 वर्ल्ड कप के लिये तमाम उथलपुथल और विरोधों के बीच महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी का जिम्मा दिया गया और नतीजा; भारत ने वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने नाम की|

धोनी को शुरुआत में संयोग से जीत हासिल करने वाला कप्तान कहा गया, उनके हर कदम को तुक्का माना गया लेकिन गुज़रता हुआ वक्त हमेशा लोगों की धारणाओं में अंतर पैदा कर ही देता है, 2011 वन डे वर्ल्ड कप में बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करके ऊपर ख़ुद को ऊपर उतारने का फैसला या फिर बारिश से प्रभावित 2013 चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल में ओएन मोर्गन और रवि बोपारा की साझेदारी को तोड़ने के लिए उस मैच में गेंदबाजी कर रहे दूसरे गेंदबाजों से कुछ खराब इकॉनमी से गेंदबाजी करने वाले इशांत से 18 वाँ ओवर करवाने का फ़ैसला, मध्यक्रम में बुरी तरह फ्लॉप हो रहे रोहित शर्मा से पारी की शुरुआत करवाने का फ़ैसला;यह कुछ ऐसी चीज़े घटित हुईं जिससे लोगों की धारणा बदली और धोनी को करिश्माई कप्तान नहीं बल्कि दूसरों से कहीं अधिक चतुर और क्रिकेट की बारीकियों को समझने वाला कप्तान समझा जाने लगा|

MS Dhoni of India in action batting during the Semi-Final match of the ICC Cricket World Cup 2019 between India and New Zealand at Old Trafford on July 10, 2019 in Manchester, England.

इंग्लैण्ड और ऑस्ट्रेलिया के ख़राब दौरे एक दाग़ की तरह हैं जो कभी मिटाये तो नहीं जा सकते हैं लेकिन भारतीय क्रिकेट में धोनी का योगदान इससे कहीं अधिक है| तुम हमेशा हमारे हीरो रहे हो और आगे भी रहोगे,सचिन भगवान हैं और मैं भारतीय;जो 33 कोटि के देवताओं को मानता है इसलिये तुम भी भगवान हो!!

कप्तानी मिलने के साथ ही अपने आप को बल्लेबाजी क्रम में नीचे धकेलना शुरू कर के धोनी ने युवाओं को पूरा मौका दिया बल्लेबाजी और ऐसा करने के बाद भी 10,000 रन बनाने के क़रीब पहुँचना एक मील के पत्थर के समान है,सक्सेसफुल रन चेज़ेज़ में उनका एवरेज 100 के करीब है और ओवरऑल 51 से ऊपर औसत है जिसका नाबाद रहने से कोई ज्यादा लेना देना नहीं है क्यूँकि अगर ऐसा होता तो मुरलीधरन का नाम सर्वाधिक औसत वाले लिस्ट में अवश्य ही शामिल होता|सर्वकालिक फिनिशर हैं धोनी, जिसका साक्ष्य उपलब्ध है न कि कोई किस्सागोई!!

India’s cricket team captain Mahendra Singh Dhoni poses with the ICC Cricket World Cup Trophy, with the Gateway of India in the backdrop, during a photo call at the Taj Palace Hotel on April 3, 2011 in Mumbai, India.

500 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने की बधाई….
39 बरस पूरे करने की बधाई देने में हिचक रहा हूँ क्योंकि अब वो क्षण नजदीक आ रहा है जब तुम अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स को उतार कर कभी अपनी पुरानी मोटर बाइक को धुलते हुये, अपने घर में जगह पालतू जानवरों के बीच उनसे खेलते हुये, पत्नी-बच्चों के साथ किसी झूले पे बैठ कर लता मंगेशकर के गाने गुनगुनाते हुये पाये जाओगे लेकिन मैं बेताब रहूँगा उस धोनी को देखने के लिये जो इन सब से दूर किसी नन्हें क्रिकेटर को क्रिकेट के गुर सिखाते हुये पाया जाएगा क्यूँकि मैं कभी नहीं चाहूँगा कि ऐसी बारीकियां तुम्हारे क्रिकेट को अलविदा कहने के साथ ही कहीं दफ़्न हो जाए!!
“एक बूढ़ा क्रिकेटर है मुल्क में या यूँ कहो..
इस अँधेरी कोठरी में एक रोशनदान है”.. (दुष्यंत कुमार से माफ़ी सहित❣️)

लेख: अरुणोदय पाण्डेय (छात्र – इलाहाबाद विश्वविद्यालय)

Written by AU Beat Media

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