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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लगेगी महामना पं० मदन मोहन मालवीय जी की भव्य प्रतिमा

पिछले काफी दिनों से विश्वविद्यालय के दरभंगा हॉल जिससे अब विवेकानंद एडमिनिस्ट्रेटिव कांपलेक्स कहा जाता है, के बाहर पोर्टिको के बगल में एक प्लेटफार्म बना कर छोड़ दिया गया था, अब अचानक कल उस पर भारत रत्न महामना मालवीय जी की एक विशाल प्रतिमा जो कि अभी प्लास्टिक से ढकी है ला कर रख दी गई है। शीघ्र ही इसका अनावरण किया जाएगा । यह बहुत प्रसन्नता की बात है। महामना के नगर में इतना बड़ा विश्वविद्यालय हो और उसमें महामना की कोई प्रतिमा न हो।

हालांकि हिंदू हॉस्टल चौराहे पर महामना की एक प्रतिमा वर्षों से है जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा ने किया था परंतु विश्वविद्यालय परिसर के अंदर अभी तक कोई प्रतिमा नहीं थी, अब यह कमी पूरी की जा सकेगी।

मालवीय जी का जन्म 25 दिसम्बर 1861 को पं० ब्रजनाथ व मूनादेवी के यहाँ हुआ था। वे अपने माता-पिता से उत्पन्न कुल सात भाई बहनों में पाँचवें पुत्र थे। मध्य भारत के मालवा प्रान्त से प्रयाग आ बसे उनके पूर्वज मालवीय कहलाते थे। आगे चलकर यही जातिसूचक नाम उन्होंने भी अपना लिया। उनके पिता पण्डित ब्रजनाथजी संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान थे। वे श्रीमद्भागवत की कथा सुनाकर अपनी आजीविका अर्जित करते थे। 1879 में उन्होंने म्योर सेण्ट्रल कॉलेज से, जो आजकल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, मैट्रीकुलेशन (दसवीं की परीक्षा) उत्तीर्ण की।

शत-शत नमन है महा मना भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी को। हम आभारी हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के।

सौजन्य: पुनीत कुमार मालवीय

Written by AU Beat Media

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