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जानिए क्यों कहते है प्रयागराज के नैनी ब्रिज को ‘शापित ब्रिज’

प्रयागराज को नैनी से जोड़ने वाले नए यमुना ब्रिज को शहर के लोग ‘शापित’ मान चुके हैं। इस ब्रिज से अब तक जीवन से हताश हो चुके 1000 से ज्यादा लोगों ने नदी में छलांग लगाई है। साल 2000 मैं तैयार हुआ यह पुल प्रयागराज को नैनी से जोड़ता है। इस पुल के बनने से मिर्जापुर और मध्य प्रदेश की ओर जाने वालों लोगो को रास्ता तो मिल गया, लेकिन इसी पुल से जीवन से हताश और निराश लोगों को कूदकर आत्महत्या करने की एक जगह मिल गई। बीते 20 सालों में इस पुल से कूदकर जान देने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। आलम यह है आत्महत्या करने वालों के लिए पुल पर सिक्योरिटी गार्ड भी लगाया गया है। लेकिन यहां से कूदकर जान देने वालों का सिलसिला आज तक रोका नहीं जा सका है। साल 2000 में जिस दिन पुल आम आदमी के लिए खोला गया उसी दिन इस पुल पर सड़क हादसे में दो लोगों की जान चली गई।  थानों के बीच में पड़ता है यह पुल

प्रयागराज का नया यमुना पुल नैनी और कीडगंज थाने की सीमा में आता है। पुल का उत्तरी हिस्सा कीडगंज में है और दक्षिणी हिस्सा नैनी में है। यहां होने वाले हादसों में सीमा विवाद बहुत होता है। कई बार तो यह तय करने में ही महीनों गुजर जाते हैं कि किस थाने की पुलिस खोजबीन का काम संभालेगी। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों थानों को जोड़कर अब तक 1000 से अधिक लोगों ने इस पुल से कूदकर जान दे दी है और काफी संख्या में लोगों को बचाया भी जा चुका है।

क्यों कहा जाता है पुल को सूइसाइड पॉइंट?
प्रयागराज के सोशल वर्कर और पुराने जानकार बाबा अवस्थी कहते हैं कि पुराने काल में मोक्ष प्राप्ति के लिए आत्महत्या की मान्यता देखी गई है। उस समय संगम के पास अक्षय वट होता था उस अक्षय वट से कूदकर लोग अपनी जान देते थे। आजकल यह अक्षय वट अकबर के बनाए गए किले के अंदर है।

बाबा अवस्थी कहते हैं कि ऐसा भी कहा जाता है कि अकबर ने फरमान जारी कर पेड़ से कूदकर जान देने पर रोक लगा दी थी। ऐसा भी कहा जाता है कि संगम किनारे बने प्रयागराज का यह किला कुंवारा है क्योंकि किले ने कभी कोई युद्ध नहीं देखा। इसलिए यह किला बलि मांगता है।

ख़बर: शिवम भट्ट

Written by AU Beat Media

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