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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : इस जगह ने यादों की वो टोकरी दी है

इलाहाबाद विश्वविद्यालय

बचपन में जब बैंक रोड से बालसन चौराहे की ओर जाना होता था तो रात को चमकती हुई इस हवेली नुमा परिसर को देखकर लगता था कौन रहता होगा यहां। थोड़े बड़े हुए और जब घड़ी देखना सीख गए तो पहली बार इसकी घड़ी से अपनी घड़ी मिलाई मालूम पड़ा हवेली कि घड़ी खराब है। फिर थोड़े और बड़े हुए और जब ११वी की कक्षा में पहुंचे तब मालूम पड़ा की देश का एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी मेरे अपने शहर में है मगर बहुत बदनाम।

२३ साल बीत गए है इस शहर में रहते हुए, लेकिन आज भी याद है वो दिन जब भगवान से हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे थे कि कोई भी कॉलेज मिल जाए ये यूनिवर्सिटी ना मिले। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की परीक्षा का रिजल्ट इतनी देर में आया की तब तक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की काउसिलिंग भी हम करा चुके और फीस भी जमा होगी। सबने ये कहकर रोक लिया b.a  ही तो करना कहीं जाने की जरुरत क्या, यही से कर लो। घर के लोग जो यूनिवर्सिटी की बुराई करते और गुंडागर्दी के बारे में बचपन से बताते थे आज वही मुझे यहां जाने बोले। उस दिन दो बात पता चली घर से बाहर निकलने के लिए b.tech college  मिलना जरूरी है और B.A की कोई औकात नहीं। फिर भी अपने साइंस स्ट्रीम में बहुत अच्छा होते हुए भी मैंने एकदम से जीवन का अलग फैसला किया था। Humanties और literature पढ़ने का। मेरे अनुभव उन बच्चो से बिल्कुल अलग है जो अपना घर छोड़कर यहां पढ़ने आए है, क्योंकि मेरा खुदका घर होते हुए भी मैंने अपना दूसरा घर यहां पा लिया था । तो साल बीतते गए, और अब तक तो इस कैंपस के चार चुनाव का हिस्सा भी बन चुके।

कब इस नापसंद आने वाली हवेली से इतनी मोहब्बत हो गई पाता ही नहीं चला। कब इसकी टपकती हुई पाइप और काई लगी दीवारों में बदसूरती देखना बंद कर दिया पता नहीं चला। कब अपना अंग्रेज़ी विभाग घर से भी ज़्यादा दिल के करीब होगया पता नहीं चला। कब इस रुकी हुई घड़ी में भी फिलोसॉफी ढूंढ लिए मालूम नहीं हुआ। कब यूनिवर्सिटी ने एक साधारण सी लड़की से एक लेखिका में तब्दील कर दिया सच मालूम नहीं हुआ। यहां बहुत कुछ देखा महसूस किया और सीखा। ये बात तो सच की ये जगह नौकरियां नहीं देती मगर यहां रहते हुए आप ज़िन्दगी में कठिनाइयो से लड़ना सीख जाते है। अगर किस्सों और कहानियों की बारी कभी आयी तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और छात्राओं के अनुभव दुनिया के किसी भी यूनिवर्सिटी में पड़ने वाले छात्रों से अलग होंगे, बेहतरीन होंगे।

ये पोस्ट एक छोटा सा तोहफा था, इस पूरी यूनिवर्सिटी को जहां से कुछ महीनों में डिग्री लेकर हम कहीं दूसरी सफर में होंगे, लेकिन इस जगह ने यादों की वो टोकरी दी है जिसमे सबसे कड़वा किस्सा भी भविष्य में मुझे हंसा देगा। बहुत कुछ छूट जाएगा, दोस्त, स्टैंड वाले अंकल का वो सैल्यूट, लाइब्रेरी वाले सर का राम राम बोलना और ये हवेली। सब उंगली उठाते है तुम पर है ना ? मगर तुम वो खूबसूरत लड़की हो जो कभी यौवन नहीं खोती, हा अब लोगो को अगर चुना और पेंट खाने से फुर्सत मिली तो तुमको भी फिर से और खूबसूरत बना देंगे। पहली नजर में तुमसे जो प्यार मुझे हुआ, वो आने वाली कई पीढ़ी को होता रहेगा, ये बात मुझे मालूम है, तो आशाएं मत छोड़ना क्योंकि तुम्हारे चाहने वाले यहां कम नहीं है।

: #कोणिका_मुखर्जी

Pic Credit – Akash Vikram

Written by AU Beat Media

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