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प्यारे इलाहाबाद विश्वविद्यालय !

प्यारे इलाहाबाद विश्वविद्यालय !

तुम प्रयाग की धरती पर किसी बहुत महान इंसान जैसे लगते हो मुझे कभी कभी , पापा की बातों में तुम समुद्र और तुम्हारी बाकी शाखाएं नदी है ! तुमने मुझे और मुझ जैसे करोड़ो लोगो को जाने कितना कुछ दिया है जिसका अंदाजा उंगलियो पर गिनकर नही किया जा सकता ! अमृता जी की भाषा में लिखूँ तो तुम्हारे साये में गुजरे दिन अगर उंगलियों पर गिनती हुँ तो उंगलियां अच्छी लगने लगती है मुझे !

तुमको पता है ! तुमने जीवन जीने के सलीके के साथ साथ कठिन परिस्थितियों से लड़ना भी सीखाया मुझे , हर वक़्त गूँजती हंसी की खनक भी तो तुममे ही सीखी थी ! मुगली बनावट वाले बड़े बड़े बरामदों में जब भी हम सहेलियाँ खिलखिला कर हँसती न यकीन मानो तुम्हारा एक एक कोना खुशियो से भरा लगता !
तुम हो तो जिंदगी गुलज़ार है !

पहले पहल सोचा करती थी कि बच्चन जी अंग्रेजी के प्रोफेसर होने के बाद भी हिन्दी के महानतम कवि कैसे हुए ? फिर तुम्हारी फ़िज़ा की याद आई तो समझ गयी कि तुम्हारी तो रग रग में प्रेम है ! जिसको जिससे प्रेम हुआ तो उसी में रम गया !

यकीन मानो जितना सुकून तुम्हारी हरी घास वाली छाओ में आता है न उतना दुनिया के किसी कोने में नही है ! मेरा मन आज भी भागकर उस हरी घास वाले छांव में चला जाता है ! अंग्रेजी विभाग की सोपान फ़लख पर बैठी जैसे किसी शायर सा महसूस करती हूँ खुद को ! कैटीन की भीड़भाड़ वाले रास्तों पर चलने से जहां अब भी डरती हूँ ,वही ज्ञानप्राप्ति के लिए अपने विषयेतर क्लास अटेंड करने मे कोई गुरेज नही ! वही सीनेट हाल को चेंननुमा घेरते हुए बनी रंगोली को देखने के लिए मैं शर्मा सर की क्लास छोड़ कर भी आ सकती हूँ!

प्रोफेसर्स की डाँट किसी मीठी गोली सरीखी लगती !
मानो जिंदगी यही से शुरू हो और यही आकर खत्म हो ! दुनियां जहां से बेखबर ! बरगद की छाँव जैसे घर का आँगन हो और बगिया के फूल मानो गाँव की गलियाँ! लाल , गुलाबी, हरे, बैंगनी , कत्थई और काहि हर रंग में तुम पूर्ण हो ! तुम्हारी वो जन्म जन्मांतर से रुकी हुई घड़ी जिसकी सुईयां दिन में एक बार सही वक़्त जरूर बताती है !

तुम कितनी विविधता को अपने में समेटे हुए हो ! कोई फोटोग्राफर है तो कोई ग्रेस से पास होता है , कोई नेता है तो कोई देवर बना घूम रहा, कोई बड़ी पोस्ट वाला अधिकारी बन गया तो कोई आज भी कैम्पस में बकैती झाड़ रहा , पर तुम्हारे लिए सबके दिल में प्रेम एकसमान !

जानते हो ! अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत 5 साल मैंने तुममे बिताये है ! तुम्हारी एक एक दरो-दीवार पे नाज है मुझे ! तुम मेरे दूसरे घर जैसे हो ! मानो तुम मुस्कान हो मेरी ! मेरी जिंदगी की एक एक सोपान फ़लख में तुम्हारा शुक्रिया लिखती हूँ ! तुम न होते तो मेरा क्या होता !
~ तुम्हारी बरगद की छांव में पली श्वेता !

:- #Shweta_Mishra…✍️

Written by AU Beat Media

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