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अक्सर जब यूनिवर्सिटी(आर्ट फैकल्टी) में दोस्त का फोन आता है

अक्सर जब यूनिवर्सिटी(आर्ट फैकल्टी) में दोस्त का फोन आता है।
भाई/बहन,यूनिवर्सिटी में रहना जरा आता हूं।

कहां मिलोगे।

Ancient के बाहर बैठे है आओ…………..

विशेषकर अर्थशास्त्र,प्राचीन इतिहास,इतिहास,संस्कृत, राजनीति आदि विभागों के छात्र जो अपने मित्र का इंतज़ार वहीं बैठकर किया करते हैं।
जी हां!दो विशालकाय पेड़ो के तनो को जितने राज पता हैं,
जितने नोट्स को उसकी डालियों ने पढ़ा है,
जितने लोगों की प्रेम कहानियों को इसके चबूतरे ने गढ़ा है,
जितनी इंतज़ार की ऊब की गालियां इसकी पत्तियों ने सुनी है,
जितने प्राचीन इतिहास के प्रोफेसरों के जलवे के किस्से इसकी हवा में घुले हैं
उतने यूनिवर्सिटी तो छोड़ दीजिए जनाब,पूरे इलाहाबाद में नहीं मिलेंगे। संस्कृत विभाग के पास से गुजरते हुए अनायास ही उन दोनों पेड़ो की तरफ आंखे तो आपकी भी उठी होंगी ना।
दोबारा कभी उस पेड़ के नीचे इंतज़ार करने या बैठेने जाए तो जरूर याद करिएगा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उस अनमोल विरासत जो वो पेड़ ना जाने कितने सालों से अपने जेहन में समेटते चले आ रहे है और वहां बैठने वाला हर छात्र उसका अभिन्न हिस्सा है………….. वो पेड़ जो गुज़ारिश करता है फिर से जाग जाने और जगाने की।।।।

:आँचल सिंह

Written by AU Beat Media

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एयू छात्रों की कुछ खासियत..

इलाहाबाद क्या है?